चीन और पाकिस्तान का एयर डिफ़ेंस सिस्टम

पाकिस्तान के पास चीन में बने एचक्यू-9, एचक्यू-16 और एफ़एन-16 जैसे एयर डिफ़ेंस सिस्टम हैं. इनमें से एचक्यू-9 को साल 2021 में पाकिस्तान ने अपने हथियारों की लिस्ट में शामिल किया था. इसे रूस के एस-300 के बराबर माना जाता है.

ज़ाहिर चीन के पास भी ऐसे एयर डिफ़ेंस सिस्टम हैं, हालांकि संजीव श्रीवास्तव कहते हैं कि चीन से मिले एचक्यू-9 सिस्टम हाल ही में भारत-पाकिस्तान संघर्ष के दौरान नाकाम नज़र आए

उनका कहना है, “चीन के पास जो एयर डिफ़ेंस सिस्टम या हथियार हैं उनका युद्ध क्षेत्र में कभी इस्तेमाल नहीं हुआ है. यानी वह कितना सफल होगा इसके बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता है क्योंकि चीन ने जो आख़िरी युद्ध लड़ा था, वो साल 1978-79 में वियतनाम में लड़ा था.”

वायु रक्षा प्रणाली को स्थिर (स्थायी तैनात) या मोबाइल (चलायमान) रूप में तैनात किया जा सकता है, और यह छोटे ड्रोन से लेकर बैलिस्टिक मिसाइल जैसे बड़े ख़तरों तक को रोकने में सक्षम होती है.

इसका मुख्य उद्देश्य हवाई हमलों से नागरिक क्षेत्रों, सैन्य ठिकानों और महत्वपूर्ण ढांचों की रक्षा करना है.

एयर डिफ़ेंस सिस्टम चार मुख्य हिस्सों में काम करता है. रडार और सेंसर दुश्मन के विमानों, मिसाइलों और ड्रोन का पता लगाते हैं. कमांड एंड कंट्रोल सेंटर डेटा प्रोसेस कर प्राथमिकता तय करता है.

हथियार प्रणालियां ख़तरों को रोकती हैं, जबकि मोबाइल यूनिट्स तेजी से तैनाती में सक्षम होती हैं, जो इसे युद्धक्षेत्र में बेहद प्रभावी बनाती हैं.

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